मटर की कचौरी (Matar Kachori) दो मुख्य चीज़ों पर आधारित होती है—

1. आटा (जिससे कचौरी बनती है)
2. मटर का भरावन (जो कचौरी के अंदर जाता है)
यह दोनों जितने अच्छे होंगे, कचौरी उतनी ही बेहतरीन बनेगी।

 आदि सभी चीज़ें विस्तार से जानेंगे।

इस रेसिपी में हम कचौरी के तीन मुख्य स्तंभों पर पूरी गहराई से चर्चा करेंगे—
1. आटा (Dough) – खस्ता, परतदार और परफेक्ट
2. मटर का भरावन (Stuffing) – हल्का मीठा, चटपटा और सुगंधित
3. तलने की तकनीक (Frying Technique) – हलवाई-स्टाइल कुरकुरापन

  आवश्यक सामग्री

 1. आटा गूँथने के लिए सामग्री

सामग्री मात्रा

मैदा 2
कपसूजी 2 बड़े चम्मच
तेल या घी4 बड़े चम्मच (मोयन)
नमक ½ चम्मच
पानी जितना आटा गूँथने में लगे जरूरत हो

 टिप मोयन का विज्ञान

मोयन जितना सही होगा, कचौरी उतनी ही ज्यादा खस्ता बनेगी।
मोयन मतलब आटे में दिया गया घी या तेल।
अगर मोयन कम होगा— कचौरी कठोर बनेगी।
अगर मोयन ज्यादा होगा— कचौरी तेल सोखेगी और टूटेगी भी।
सही मोयन— कचौरी हलवाई जैसी खस्ता बनाती है।
मोयन की पहचान:- मैदा हाथ से दबाने पर हल्का–सा बंध जाए—तो मोयन सही है।

 2. मटर का भरावन के लिए सामग्री (Matar Aloo Filling)

सामग्री मात्रा

  • उबले हुए आलू 3 मीडियम आकार
  • हरे मटर1 कप
  • ताज़े मटर / फ्रोजन मटर 1 कप
  • हरी मिर्च पेस्ट1 चम्मच
  • अदरक पेस्ट1 चम्मच
  • धनिया पत्ती (बारीक कटी)2 बड़े चम्मच
  • जीरा ½ चम्मच
  • सौंफ 1 चम्मच
  • धनिया पाउडर 2 चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर1 चम्मच
  • हल्दी½ चम्मच
  • अमचूर पाउडर या नींबू½ चम्मच गरम मसाला½ चम्मच
  • नमक स्वाद अनुसार
  • तेल 2 बड़े चम्मच
  • हींग 2 चुटकी
  • गरम मसाला ¼ चम्मच

Matar Kachori मटर का भरावन हमेशा थोड़ा सूखा, थोड़ा दानेदार और सुगंधित होना चाहिए। अगर यह बहुत गीला होगा तो कचौरी फट जाएगी। अगर बहुत सूखा होगा तो स्वाद नहीं आएगा। यह मसाला बैलेंस ही मटर कचौरी को हल्का-मीठा, चटपटा और खुशबूदार बनाता है।

आटा अगर सही है, तो कचौरी 100% सही नहीं बनेगी।
आटा गलत—तो कचौरी चाहे कितनी भी बार तलो, सही नहीं बनेगी।

 आटा कैसे गूँथें? 

कचौरी का स्वाद केवल भरावन पर नहीं, बल्कि उसके आटे पर भी निर्भर करता है। इसलिए इसे सही तकनीक से तैयार करना जरूरी है।

 चरण 1 : सूखी सामग्री मिलाएं

एक बड़ी परात/बाउल में मैदा, सूजी और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं। सूजी कचौरी को कुरकुरापन बढ़ाना और कचौरी को सख्त होने से मदद करती है।

 चरण 2 : मोयन डालें

मोयन (घी या तेल) डालें और हथेलियों से अच्छी तरह रगड़ते हुए मैदा में मिला दें। ध्यान रहे—मोयन को अच्छी तरह मिलाकर हर दाने में पहुंचाएँ। यह खस्ता कचौरी का आधार है।

 कैसे पता चले मोयन सही है?

अगर आप मैदा को हाथ में लेकर दबाएँ और वह हल्का–सा एक साथ टिक जाए, तो मोयन एकदम सही है।
एक मुट्ठी मैदा उठाकर दबाएँ—यदि वह गट्ठे जैसा बन जाए, तो मोयन बिल्कुल सही है।

चरण 3 : आटा गूँथना

अब थोड़ा–थोड़ा पानी डालकर एक सख्त लेकिन स्मूथ आटा गूँथें। आटा बहुत नरम होगा तो कचौरी फूलेंगी लेकिन खस्ता नहीं होंगी। न तो बहुत सख्त हो, न बहुत नरम। 10–20 मिनट ढककर रख दें। आटा होना चाहिए—
✔ मध्यम सख्त
✔ चिकना
✔ दरारों से मुक्त
• पूरी के आटे से थोड़ा ज्यादा सख्त—यही सही कचौरी वाला आटा होता है। आटा बहुत सख्त होगा तो बेलने में समस्या होगी और कचौरी फट सकती हैं।

 चरण 4 : आटे को ढककर आराम देना

आटे को कम से कम 15–20 मिनट ढककर रख दें। इससे आटा सेट हो जाता है और बेलने में कचौरी बनाने में आसानी होती है।

 भाग 3 : मटर–आलू का भरावन तैयार करना (Making the Filling)

यह कचौरी का दिल होता है। अगर इसमें मसालों का संतुलन सही हो, तो कचौरी का स्वाद अविश्वसनीय हो जाता है।हलवाई स्टाइल मटर का भरावन कचौरी का दिल है। जितना अच्छा भरावन होगा, कचौरी का स्वाद उतना ही अद्भुत होगा।

 चरण 1 : मटर को हल्का नरम करें

यदि ताज़े मटर कड़े हैं, तो उन्हें 5 मिनट उबाल लें। फ्रोज़न मटर सीधे इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मटर को मसलकर थोड़ा दानेदार रखें।

 चरण 2 : आलू मैश करें

उबले हुए आलू को मैशर से मैश कर लें ताकि भरावन चिकना बने और कचौरी फटने न पाए।

 चरण 3 : मसाले भूनना

एक कड़ाही में तेल गर्म करें। फिर उसमें—
• जीरा
• सौंफ
डालें और हल्का चटकने दें।

 चरण 4 : सुगंध वाले पेस्ट डालें

कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें। जीरा और सौंफ डालें। अब इसमें अदरक का पेस्ट और हरी मिर्च का पेस्ट डालें और 1 मिनट भूनें।

 चरण 5 : मटर डालें |

अब मटर डालकर 2–3 मिनट भूनें।

 चरण 6 : मसाले डालें

अब निम्न मसाले डालें—
  • हल्दी
  • लाल मिर्च
  • धनिया पाउडर
  • नमक
  • 2 चुटकी हींग
यह तीन सामग्री मटर कचौरी की असली खुशबू देती हैं। अदरक–मिर्च पेस्ट डालें अदरक-हरी मिर्च पेस्ट डालकर 1 मिनट भूनें। धीमी आंच पर भूनें।

 चरण 7 : आलू मिलाएँ

अब मैश किए हुए आलू डालकर सब कुछ अच्छी तरह मिलाएँ। मटर डालकर 4–5 मिनट तक अच्छी तरह भूनें। धीमी आँच पर भूनने से स्वाद बढ़ता है। सबको अच्छी तरह मटर में मिलाएँ।
• अमचूर (या नींबू का रस)
• गरम मसाला
• धनिया पत्ती
मिलाएँ और 3 मिनट धीमी आंच पर पकाएँ।

 भरावन तैयार!

इसे ठंडा होने दें। गर्म भरावन डालेंगे तो कचौरी फट सकती हैं। भरावन गीला नहीं होना चाहिए। गीला भरावन कचौरी पकाते समय फाड़ देता है।

 भाग 4 : कचौरी बनाना (Assembling the Kachori)

चरण 1 :अब असली काम शुरू!
आटा छोटी–छोटी लोइयों में बाँटें| गोल, चिकनी लोइयाँ बनाएं और ध्यान दें कि उनमें दरारें न हों।

 चरण 2 : लोई बेलना

लोई को हथेली से हल्का दबाएँ और बेलन की मदद से 3–4 इंच की छोटी–सी पुरी जैसी बेलें।

 चरण 3 : भरावन भरना

बीच में 1–1.5 चम्मच मटर का भरावन रखें। किनारों को उठाकर अच्छी तरह बंद करें। ऊपर की जोड़ को थोड़ा मोड़कर चिपका दें।

 चरण 4 : किनारों को बंद करना

किनारों को एक–एक करके ऊपर लाएँ और घुमाकर अच्छी तरह बंद करें ताकि भरावन बाहर न निकले।

⭐ चरण 5 : दोबारा हल्के हाथ से बेलना

अब भरी हुई लोई को बहुत धीरे–धीरे हल्के हाथ से बेलें।
• ज्यादा दबाव डालेंगे तो फट जाएगी।
• कम दबाव डालेंगे तो मोटी रह जाएगी।
अब इस भरी हुई लोई को बहुत हल्के हाथों से 3–4 इंच की मोटाई तक बेलें।

भाग 5 : कचौरी तलना (Frying the Kachori)

 तेल का तापमान

हलवाई-स्टाइल खस्ता कचौरी की असली कुंजी है—तेल का तापमान। तेल मीडियम–लो फ्लेम पर गर्म होना चाहिए।
• बहुत गरम तेल = कचौरी जल्दी लाल हो जाएगी लेकिन अंदर कच्ची रह सकती है।
• ठंडा तेल = कचौरी तेल पी लेगी और कुरकुरी नहीं बनेगी।

तेल कैसा होना चाहिए?

✔ मध्यम गर्म
✔ न ज्यादा गरम
✔ न ठंडा

 चरण 1 : तेल में डालना

  • अगर तेल बहुत गरम होगा—कचौरी तुरंत लाल हो जाएगी अंदर से कच्ची रह जाएगी |
  • अगर तेल ठंडा होगा—कचौरी तेल सोखेगी कुरकुरी नहीं बनेगी |
जब तेल सही तापमान पर हो, एक-एक करके कचौरी को धीरे से तेल में डालें। धीमी आंच पर तलना सबसे जरूरी है। धीमी आंच पर ही असली खस्ता परत बनती है।

 चरण 2 : फूलने तक तलना

जैसे ही कचौरी ऊपर आए, उसे हल्का–सा दबाएँ ताकि वह फूल जाए।

⭐ चरण 3 : सुनहरा होने तक तलें

धीमी आंच पर तलने से कचौरी बहुत खस्ता बनेगी। दोनो तरफ से गोल्डन ब्राउन होने तक तलें। अब कचौरी निकालकर टिशू पर रखें।

 भाग 6 : कचौरी खस्ता कैसे बनेगी? (Pro Tips for Crispy Kachori)

• मोयन बिल्कुल सही मात्रा में डालें।

 

• आटा न बहुत नरम हो, न बहुत सख्त।
• बेलते समय बहुत जोर न लगाएँ।
• भरावन ठंडा होना चाहिए।
• कचौरी को धीमी आंच पर तलें।
• तेल में ज्यादा कचौरी एक साथ न डालें।
1. आटे में सही मोयन लागू करना
3. भरावन बिल्कुल सूखा रखना
5. कचौरी को धीरे तलना
6. तेल की गर्मी एक समान रखना
7. बेलते समय समान मोटाई रखना
8. कचौरी में हवा न भरने देना
9. तले बाद ढककर न रखना
10. सूजी मिलाना—हलवाई उसी से कुरकुरापन लाते हैं

भाग 7 : परोसना कचौरी किसके साथ खाएँ?

मटर कचौरी की जोड़ी कई चीज़ों के साथ बनती है
• रसेदार आलू की सब्जी (ढाबा स्टाइल)
• मटर की सब्जी
• रायता
• चाय के साथ स्नैक में
• पुदीने की चटनी
• कढ़ी
• मिंट चटनी
• इमली की खट्टी–मीठी चटनी
• दही
• टमाटर प्यूरी
• मिर्च पेस्ट
•  कटहल की सब्जी (बनारस में मशहूर)
•  अचार + प्याज
 Matar ki Kachori Kaise Banti hai Recipe घर पर बनाए खस्ता और स्वादिष्ट मटर कचोरी की रेसिपी कैसे बनाते हैं |

 भाग 8 : Matar Kachori मटर कचौरी के अलग–अलग वैरिएशन

• राजस्थानी प्याज़ कचौरी
• बनारसी मसाला कचौरी
• डाल कचौरी + मटर आलू की सब्जी
• भरवां खस्ता कचौरी
• बेक्ड कचौरी (Low Oil Version)

 भाग 9 : सामान्य गलतियाँ और समाधान

❌ कचौरी फट जाती है(कचौरी खस्ता बनाने के टिप्स)
कचौरी तलने के लिए तेल—
✔ गर्म हो
लेकिन
❌ बहुत ज्यादा गर्म न हो।
मीडियम-लो आंच ही परफेक्ट है।
✔ भरावन ठंडा रखें
✔ आटा कड़ा रखें या आटा टाइट रखें
कचौरी नहीं फूलती
✔ मोटाई असमान न रखें
✔ तेल बहुत गर्म न हो
❌ कचौरी नरम पड़ जाती है
✔ तलने के बाद ढकें नहीं
✔ धीमी आंच पर तलें
❌ कचौरी कुरकुरी नहीं बनती
✔ तेल मीडियम-लो पर रखें
✔ आटे में सही मोयन डालें
❌ कचौरी में तेल ज्यादा रह जाता है
✔ आटा टाइट रखें
✔ सूजी मिलाएँ

 भाग 10 : स्टोरेज और मील प्रेप

भरावन को 2 दिन तक फ्रिज में रख सकते हैं।
• आधी तली कचौरी फ्रीज़ भी की जा सकती है।
  1.  आटा 1 दिन आसानी से फ्रिज में रखा जा सकता है
  2.  कचौरी तलकर एयरटाइट में रखें—2 दिन तक खस्ता रहती है
  3.  माइक्रोवेव में गरम न करें, तवा या एयरफ्रायर पर गरम करें

अंतिम परिणाम

आपकी मटर कचौरी अब पूरी तरह तैयार है—
  1.  बाहर से खस्ता
  2.  अंदर से मसालेदार
  3.  सुगंधित
  4.  हलवाई-स्टाइल
यह रेसिपी आपको एकदम वही पारंपरिक स्वाद देगी जो उत्तर भारत की गलियों में मिलने वाली मटर कचौरियों में मिलता है।

[ ] कचौरी का फ्लेवर साइंस

यह हिस्सा समझने लायक है—
मटर कचौरी में तीन चीज़ें मिलकर स्वाद बनाती हैं—
1) Umami + Sweetness – मटर का हल्का मीठा स्वाद
2) Heat – लाल मिर्च, हरी मिर्च
3) Aroma – सौंफ, जीरा, हींग, गरम मसाला
इनके संतुलन से वह विशेष सुगंध बनती है जो हलवाई की दुकानों में आती है।

मटर कचौरी के प्रकार (Variations)

1. बनारसी मटर कचौरी (सबसे मशहूर)
2. राजस्थानी मटर कचौरी (गेहूँ मैदे से)
3. दिल्ली स्टाइल मटर कचौरी + कढ़ी
4. बनारसी गरमा गरम मटर कचौरी + चने की सब्जी
5. स्टफ्ड प्याज़ मटर कचौरी
6. एयर-फ्रायर मटर कचौरी (लो-ऑइल)

निष्कर्ष

ऊपर दिए गए चरणों का पालन करके आप एकदम बाज़ार जैसी बल्कि उससे भी बेहतर मटर–आलू की खस्ता, फूली हुई, मसालेदार कचौरी घर पर आसानी से बना सकते हैं। अगर चाहें तो गहराई वाली रेसिपी दे रहा हूँ। मैं आपको सबसे आसान, स्वादिष्ट और खस्ता कचौरी की रेसिपी दे रहा हूँ। इसे कोई भी घर पर आसानी से बना सकता है। यह सिंपल वर्शन है, जिसे आप अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज़ भी कर सकते हैं। यह एक प्रोफेशनल–लेवल विस्तार है जिसमें सामग्री, तकनीक, टिप्स, गलतियों से बचाव, वैरिएशन, सर्विंग—सब कुछ शामिल है।
मटर कचौरी उत्तर भारत के नाश्तों की जान है। चाहे वह बनारस की गलियाँ हों या इलाहाबाद की चाय की दुकानों की हर जगह सर्दियों की सुबह एक खस्ता, गर्मागर्म मटर कचौरी और उसके साथ रसेदार आलू की सब्जी खाए बिना
मटर कचौरी दिन की शुरुआत अधूरी लगती है। कचौरी सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारतीय भोजन-व्यवहार का हिस्सा है। यह घरों में त्योहारों में बनती है विशेषकर दशहरा, छठ, दीवाली, होली पर। इस रेसिपी को पढ़ने के बाद आप समझ जाएंगे कि हलवाई क्यों इतनी खस्ता, परतदार और सुगंधित कचौरी बनाते हैं, और घर पर क्यों कई लोगों की कचौरी न फूलती, न खस्ता बनती है। मटर की कचौरी उत्तर भारत का बेहद लोकप्रिय नाश्ता है, खासकर ठंड के मौसम में जब ताज़े हरे मटर आसानी से मिल जाते हैं। यह बाहर से खस्ता, परतदार और अंदर से मसालेदार होती है। मटर की हल्की मिठास और मसालों की गर्माहट मिलकर एक ऐसा स्वाद बनाती है जिसे खाने के बाद बार-बार याद किया जाता है। होटल-स्टाइल, हलवाई-स्टाइल और बनारसी अंदाज़ में है, जिसमें कचौरी को एकदम फूली हुई, कुरकुरी और लंबे समय तक खस्ता रखने वाली तकनीकें भी शामिल हैं। अगर आप भी बनाना चाहते हैं मटर कचोरी तो इस आर्टिकल के माध्यम से आप बना सके एकदम सिंपल तरीके से कस्ती खुली हुई कुरकुरे जैसी आपको इस आर्टिकल के माध्यम से कुछ भी समझ में आया तो मुझे कमेंट करें और आपको क्या-क्या रेसिपी चाहिए वह भी कमेंट कर सकते हैं तो आपको मटर कचोरी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर बताना धन्यवाद |

 

कचौड़ी बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए?

खस्ता कचौरी की सामग्री

एक कप आता
घी या तेल
स्वाद अनुसार नमक
पानी अपने अनुसार
तलने के लिए घी या तेल
हरे मटर फ्रेश
जरा एक छोटा चम्मच
रिंग एक छोटा चम्मच
हरी मिर्च बारीक कटी हुई या पेस्ट
अदरक कद्दूकस किया हुआ पेस्ट
धनिया पाउडर एक बड़ा चम्मच
सॉफ्ट पाउडर
गरम मसाला एक छोटा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर एक छोटा चम्मच
अमचूर पाउडर एक चम्मच

 मटर कचौरी एक स्वादिष्ट स्नैक है Matar Kachori खाने के फायदे

1. मटर में भरपूर पोषण
मटर में मौजूद होते हैं:
• प्रोटीन
• फाइबर
• विटामिन A, B, C
• आयरन, मैग्नीशियम, जिंक
इससे पाचन, ऊर्जा और इम्युनिटी को लाभ मिलता है।
2. अच्छी प्रोटीन क्वालिटी वाला स्नैक
मटर + मैदा/गेंहूँ के मिलकर एक संतोषजनक और पेट-भरने वाला भोजन बनता है। इससे भूख देर तक नहीं लगती।
3. पाचन में मदद
मटर का फाइबर पाचन में सहायक होता है, कब्ज में भी राहत देता है।
4. ठंड के मौसम में ऊर्जा देता है
तली हुई कचौरी शरीर को गर्मी और ऊर्जा देती है — इसलिए सर्दियों में खास तौर पर खाई जाती है।
5. मसालों के कारण लाभ
अदरक, जीरा, धनिया, सौंफ जैसे मसाले पाचन सुधारते हैं और एंटी-इन्फ्लेमेटरी फायदे देते हैं।

 धन्यवाद राधे राधे