Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan 2025- 500 साल बाद राम मंदिर में लहराएगा धर्म ध्वज | PM Modi धर्म ध्वज क्या है धार्मिक महत्व |

अयोध्या में आज झंडा ध्वजारोहण: एक ऐतिहासास्‍मित

Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan 2025- 500 साल बाद राम मंदिर में लहराएगा धर्म ध्वज 

परिचय

25 नवंबर 2025 का दिन अयोध्या के इतिहास में एक और मील का पत्थर बनकर उभरा है। इसी दिन श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर (spire) पर भगवा झंडा फहराया
पीएम मोदी ने अयोध्या राम मंदिर में अपने भाषण में कहा, ‘ध्वजारोहण के इस सुअवसर पर मैं दुनिया भर के राम भक्तों को हृदय से बधाई देता हैं। राम मंदिर के निर्माण में योगदान देने वाले हर एक व्यक्ति का मैं आभार व्यक्त करता हूं। में राम मंदिर के निर्माण में शामिल हर मजदूर, कारीगर, प्लानर, आर्किटेक्ट और कार्यकर्ता को बधाई देता हूं। सैकडों सालों के संघर्ष का एक साकार रूप है। हमारी आने वाली हजारो सदियों तक यह ध्वज भगवान राम के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करेगा।
कोई भेदभाव या दर्द न हो, शांति और खुशी हो, कोई गरीबी न हो और कोई लाचार न हो। यह ध्वज एक संकल्प है, एक सफलता है निर्माण के संघर्ष की एक पूरी कहानी है,
गया — जिसे “धर्मध्वज” कहा गया है। यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक झंडा नहीं है, बल्कि मंदिर के निर्माण की पूर्णता, रामराज्य के आदर्शों, और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक सार्वजनिक उद्घोषणा भी है। इस घटना का ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व बहुत गहरा है। देशभर से आए करीब 8000 मेहमान इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। ध्वजारोहण से पर्व पीएम मोदी ने सप्तमंदिर में सप्त ऋषियों के दर्शन और भगवान राम की आरती की। राम मंदिर के शिखर पर फहरा रहा यह ध्वज केवल एक ध्वज नहीं है। यह पूरी तरह से भारतीय सभ्यता के कायाकल्प का ध्वज है। भगवा रंग, सूर्यवंश का निशान, ओम शब्द और कोविदारा वृक्ष राम राज्य की महिमा दिखा रहे हैं। ऐसा राम राज्य जहां सत्य ही धर्म है,

अयोध्या और राम जन्मभूमि की प्राचीनता

अयोध्या, हिन्दू धर्म में भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मानी जाती है। यह शहर रामायण के अनुसार सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी था और दशरथ के समय से ही धार्मिक महत्ता रखता रहा। युगों से यह स्थान विश्वास, आस्था और संघर्ष का केंद्र रहा है। बाबरी मस्जिद–मंदिर विवाद, लंबे न्यायिक लड़ाई और सामाजिक आंदोलनों के बाद, राम जन्मभूमि पर मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ — और यह झंडा फहराना उसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
राम मंदिर पर धर्मध्वजा को फहराया गया है। 161 फीट की ऊंचार्ड पर इस केसरिया ध्वज क फहराए जाने के बाद मोहन भागवत ने संबोधित किया। राम मंदिर का निर्माण संपूर्ण हो गया है और इससे उन लोगों की आत्मा को तृप्ति मिली होगी।सुर्य हर दिन सतत नेकलता है और ढलता है। लेकिन उसकी प्रक्रिया कभी रुकती नहीं। ऐसे ही हिंदु समाज भी नहीं रुक और हम 500 साल बाद इस केसरिया ध्वज को अयोध्या के राम मंदिर में देख रहे हैं। आरएसएस लीडर ने कहा कि अब हमारा यही संकल्प होना चाहिए कि यह धर्म ध्वजा और ऊंची प्रतिष्ठ हासिल करे। हम ऐसे समाज का निर्माण देश समद्धि के शिखर पर पहंचे हेंदु समाज ने लगातार 500 साल और फिर बाद के लंबे आंदोलन में हमने साबित किया कि निरंतरत रडे तो सब हासिल होता है। यही बात हमें भगवान कृष्ण और सुर्य समझाते हैं। धर्म ध्वजा को पीएम मोदी ने फहराया और उसके बाद कार्यक्रम को भी संबोधित किया यह हमारे जन्म की सफलता है और सपनों के साकार होने जैसा है। मोहन भागवत ने कहा कि हिंदु समाज ने सदियों तक संघर्ष किया और तब यह शुभ अवसर आया है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी युपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत कर्ड गणमान्य लोग मौजूद थे।

मंदिर निर्माण और “प्राण प्रतिष्ठा” से ध्वजारोहण तक

प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024):- मंदिर के गर्भगृह (garbhagriha) में रामलला की प्रतिमा की स्थापना की गई थी, जिसे “प्राण प्रतिष्ठा” कहा गया। यह कदम धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसे भगवान राम की प्रतीकात्मक “जीवंत” उपस्थिति के रूप में देखा गया।

• ध्वजारोहण (25 नवंबर 2025):- यह मंदिर निर्माण की औपचारिक पूर्णता और राम मंदिर की “संपूर्ण संरचनात्मक पुष्टि” का प्रतीक है। कुछ पुरोहितों ने इसे “दूसरी प्राण प्रतिष्ठा” कहा है, क्योंकि इस समारोह से मंदिर अपने सभी पोर्टल, उसकी पूरी वास्तु और सार्वजनिक पहचान को स्थापित करता है।

केसरिया रंग का महत्व: 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहराया गया यह केसरिया ध्वज त्याग, धर्मनिष्ठा और रामराज्य के मूल्यों का प्रतीक है केसरिया (भगवा) रंग सनातन परंपरा में त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है, यह जान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का भी प्रतिनिधित्व करता है. रघुवंश के शासनकाल में इस रंग का विशेष महत्व था।ध्वजारोहण के साथ ही पुरी अयोध्या नगरी में भक्ति, उत्साह और माहौल छा गया. श्रद्धालू अपनी आंखों के सामने देखकर भाव हो गए. दूर-दूर से लोग धर्म ध्वजा को लहराते हुए देखने के लिए राम नगरी आए हुए थे.

ध्वजारोहण समारोह का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व |

मुहूर्त का महत्व |

• समारोह अभिजीत मुहूर्त में सम्पन्न हुआ, जो हिंदू पंचांग में बहुत शुभ माना जाता है।

• यह समय लगभग 11:45 बजे सुबह से 12:29 बजे दोपहर तक है — पूरी तरह से शुभ ग्रह स्थिति के साथ।

• इसी दिन विवाह पंचमी है — राम और सीता के विवाह का पारंपरिक पर्व।

• इस प्रकार यह आयोजन न सिर्फ मंदिर के भौतिक निर्माण की उद्घोषणा है, बल्कि एक पवित्र ज्योतिषीय और धार्मिक “समय-संयोजन” पर हो रहा है, जो इसे और अधिक आध्यात्मिक रूप देता है।

झंडे का प्रतीकवाद — “धर्म ध्वज”Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan 2025- 500 साल बाद राम मंदिर में लहराएगा धर्म ध्वज | धर्म ध्वज क्या है धार्मिक महत्व |

ध्वज पर अंकित पवित्र चिहन: धर्मध्वज पर तीन प्रमुख चिह्ल अंकित हैं: सूर्यओम, और कोविदार वृक्ष
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• सूर्य: धर्म ध्वज पर एक तेजस्वी सर्य की छवि है, जो भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है ।यह प्रभामंडल, ऊर्जा और दिव्य शक्ति का प्रतीक है। राम का वंश सूर्यवंश से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए सूर्य का प्रतीक राम की वीरता और दिव्यता को दर्शाता है। सूर्यदेवता को भी ध्वज पर चिह्नित किया गया है, जो विजय का प्रतीक माने जाते हैं. माना जाता है कि यह पूरा ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है.

• ओम: सभी मंत्रों का प्राण माना जाने वाला “ऊँ’, ध्वजा पर अंकित होकर संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है
यह मूल ध्वनि (प्राण मंत्र) है, जिसे ब्रह्मांड की सार्वभौमिकता और आध्यात्मिकता से जोड़कर देखा जाता है।

• कोविदार वृक्ष: यह एक पौराणिक वृक्ष है, जिसे पुराणों में वर्णित माना जाता है। कहा जाता है कि यह मंडर और पारिजात वृक्षों का संकर है। यह चिह्न रघुवंश की परंपरा में अत्यंत महत्वपुर्ण माना गया है. प्राचीन ग्रंथों में इसे पारिजात और मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष बताया गया है, जो आज के कचनार वृक्ष जैसा दिखता है. सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज पर सदियों से इसी वृक्ष का प्रतीक अंकित होता रहा है. वाल्मीकि रामायण में भी भरत के ध्वज पर डसका वर्णन मिलता है

झंडे का केसरिया (भगवा) रंग त्यागबलिदानभक्ति और राष्ट्रीय-सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
ये प्रतीक इस झंडे को सिर्फ एक धार्मिक झंडा न बनाकर, एक दार्शनिक और आध्यात्मिक पाठ भी बनाते हैं — यह रामराज्य, सनातन धर्म और सांस्कृतिक निरंतरता के मूल संदेश को प्रेरित करता है।धर्म ध्वजा गुजरात की एक पैराशूट निर्माण कंपनी द्वारा 25 दिनों में तैयार की गई है.|

Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan 2025- 500 साल बाद राम मंदिर में लहराएगा धर्म ध्वज | PM Modi धर्म ध्वज क्या है धार्मिक महत्व |

समारोह की तैयारियाँ और आयोजन

शहर की सजावट और स्वच्छता

• अयोध्या नगर और मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है। समाचारों के अनुसार यह आयोजन बहुत व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है।
• ध्वजारोहण के पहले, शहर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। अयोध्या नगर निगम, स्थानीय वॉलंटियर्स और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर मंदिर और आसपास के इलाकों की साफ-सफाई की है।
• कूड़ा-करकट प्रबंधन, यात्री भीड़ पर नियंत्रण और पैदल यातायात आदि के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु और आमजन दोनों के लिए आयोजन सुरक्षित और सुगम हो सके।

सुरक्षा व्यवस्था

• यह एक बहुत महत्वपूर्ण, हाई-प्रोफाइल आयोजन है — इसलिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं।
• कई तकनीकी स्क्वाड्स, एटीएस, साइबर कमांडो और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ तैनात की गई हैं ताकि न केवल स्थल, बल्कि डिजिटल सुरक्षा भी मजबूत रहे।
• आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे महत्त्वपूर्ण गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी है, जिससे सुरक्षा की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

झंडे की तकनीकी तैयारी

• झंडे को बनाने के लिए विशेष सामग्री (पैराशूट-ग्रेड कपड़ा) का उपयोग किया गया है ताकि वह ऊँचाई, तेज हवा, बारिश आदि का सामना कर सके।
• इस 10 फीट ऊंचे और 20 फीट लंबे इसे टिकाऊ पैराश्ट-ग्रेड कपडे और प्रीमियम सिल्क के धागों से बनाया गया है. झंडे का आकार 10 फुट ऊँचा और 20 फुट लंबा है।
• अयोध्या के राम मंदिर के ध्वजदंड (पोल) 42 फुट ऊंचा है और झंडा मंदिर के 161 फुट ऊँचे शिखर पर फहराया गई यह केसरिया धर्म ध्वजा अनेक मायनों में बेहद खास है.
• झंडा फहराने की प्रणाली में मोटे वायर और कपड़ा केबल का उपयोग किया गया है ताकि झंडा सुरक्षित रूप से उठ सके और हवा में लहरा सके।
• यह ध्वज 60 किमी। घंटा तक की हवा, बारिश और धूप का सामना करने में सक्षम है, जो इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करता है,
ध्वज के आयाम-
लंबाई: 20 फीट
चौडाई: 10 फीट
ध्वजदंड की ऊंचाई: 42 फीट

अपने भीतर राम को जगाने का संकल्प लें- पीए मोदी

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, ‘राम मंदिर के शिखर पर फहरा रहा यह ध्वज केवल एक ध्वज नहीं है। यह परी तरह से भारतीय सभ्यता के कायाकल्प का ध्वज है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें अपने अंदर राम को जगाना होगा। अपने भीतर के राम की प्राण प्रतिष्ठा करनी होगी। डस संकल्प के लिए आज से बडा सुअवसर कोई नहीं हो सकता। इसलिए, हम संकल्प लें कि अपने भीतर राम जगाएंगे।

[  ] राम मंदिर कब बना था Ayodhya Ram Mandir

राम मंदिर का निर्माण कार्य 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू किया गया। 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया। दिसंबर 2023 में राम मंदिर के पहले फेज के निर्माण कार्य को प्र कराया गया। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2022 को इसका उद्धाटन किया था |

वर्तमान घटना का महत्व

आधिकारिक रूप से मंदिर पूर्णता की घोषणा

ध्वजारोहण समारोह, जैसा कि कई पुराने और नए स्रोत बता रहे हैं, मंदिर निर्माण कीपूर्ति का प्रतीकहै। यह दर्शाता है कि मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं रहा — वह अब पूरी तरह संरचित, “राजकीय-धार्मिक” प्रतीक हो गया है।
कुछ पुरोहित इस घटना को “दूसरी प्राण प्रतिष्ठा” कहते हैं क्योंकि यह उस क्षण को दर्शाता है जब मंदिर का पूरा ढांचा आध्यात्मिक रूप से सार्वजनिक रूप से सक्रिय होता है।

रामराज्य और सांस्कृतिक पुनरुत्थान

• झंडे को “रामराज्य के आदर्शों” का प्रतिनिधि माना जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह झंडा रामराज्य का झंडा है, जो सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
• यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं है; यह राष्ट्रीय पहचान, संस्कृति, और देश की ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है।
• मंदिर ट्रस्ट ने यह भी घोषणा की है कि यह झंडा साल मेंदो बार बदला जाएगा — चैत और शारदीय नवरात्रि के समय। यह फैसला झंडे की क़द्र, सम्मान और समय-सम्बंधित परंपराओं को दर्शाता है।

सामुदायिक और सामाजिक सम्मिलन

• इस ध्वजारोहण समारोह में लगभग 6,000–9,000 आमंत्रित अतिथि होंगे, जिनमें विभिन्न सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल होंगे।
• मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि निमंत्रित लोगों में वे समाज के ऐसे वर्ग भी हैं, जिनके साथ राम की कथाओं में जुड़ी कहानियाँ हैं — जैसे निशाद राजाशबरी माता, और अन्य समुदाय।
• यह पहल “एकता”, “संवाद” और “सामुदायिक पुनर्निर्माण” की दिशा में एक सांकेतिक कदम के रूप में देखी जा सकती है।

चुनौतियाँ और विवाद

हर ऐतिहासिक आयोजन के साथ चुनौतियाँ भी होती हैं, और ध्वजारोहण भी इससे अलग नहीं है:
• सुरक्षा जोखिम: इतने बड़े स्तर पर सुरक्षा की व्यवस्था करना सरल नहीं है। वीआईपी आगमन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु, और मीडिया की उपस्थिति, ये सभी जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
• राजनीतिक संवेदनशीलता: राम मंदिर का इतिहास राजनीतिक रूप से बहुत जटिल रहा है। इस तरह के समारोहों पर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोणों से समीक्षा होगी।
• धार्मिक प्रतीकवाद: झंडे पर मौजूद प्रतीकों (सूर्य, ओम, कोविदार वृक्ष) को कुछ लोग बहुत पवित्र मानते हैं, जबकि अन्य लोग इसे “राजनीतिक संदेश” के रूप में देख सकते हैं।
• लॉजिस्टिक बोझ: इतने बड़े आयोजन के लिए यातायात, सफाई, भीड़ प्रबंधन, भोजन और आवास जैसी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाना एक बड़ी चुनौती है।
• स्थायी रखरखाव: झंडे का भारी, विशेष सामग्री से बना होना उसे हवाई और मौसमीय चुनौतियों के लिए संवेदनशील बना सकता है; व्यवस्था यह सुनिश्चित करनी होगी कि झंडे का रखरखाव और बदलना नियमित हो।

भविष्य की दिशा और संभावनाएँ

ध्वजारोहण समारोह सिर्फ एक समारोह नहीं है — यह भविष्य की दिशा का बीड़ा भी है:
• संस्कृति पर्यटन: अयोध्या एक धार्मिक पर्यटन हब के रूप में और मजबूत हो सकता है। इस तरह के कार्यक्रम पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं, और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
• आधिकारिक प्रतीक: यह झंडा अब राम मंदिर का आधिकारिक प्रतीक बन सकता है, और भविष्य में धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजनों में इसका उपयोग बढ़ सकता है।
• सांस्कृतिक शिक्षा: झंडा और उसके प्रतीक आधुनिक पीढ़ियों को राम और रामायण की सांस्कृतिक और दार्शनिक गहराइयों को याद दिलाते हैं। स्कूलों, धार्मिक संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों में इसके महत्व पर चर्चा की जा सकती है।
• आध्यात्मिक पुनरुत्थान: यह आयोजन उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है जो आध्यात्मिक पुनरुग्रह, धार्मिक एकीकरण और सांस्कृतिक पहचान की सराहना करते हैं।
• स्थिरता और परंपरा: झंडा बदलने की परंपरा (दो बार प्रतिवर्ष) धार्मिक और सांस्कृतिक निरंतरता को बनाये रखने में मदद कर सकती है। यह न सिर्फ झंडे का सम्मान बढ़ाता है, बल्कि लोगों को एक सालाना रचनात्मक चक्र में जोड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “सदियों पुराने घाव भर रहे हैं यानी 500 सालों की प्रतीक्षा, संघर्ष और आस्था आज पूरी हुई। उन्होंने इसे एक लंबी यात्रा का “परिपूर्णता क्षण बताया।
• उन्होंने यह कहा कि यह ध्वज सिर्फ एक झंडा नहीं, बल्कि “भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का ध्वज” है। इसका रंग, सूर्यवंश, ‘ॐ’ और कोविदर वृक्ष — ये तमाम प्रतीक है आदर्शों को दर्शाते हैं।
• मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि वे राम सत्य, धर्म, Maryada (मर्यादा), करुणा, न्यायको अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि भारत को चाहिए कि 2047 तक — जब आज़ादी को 100 साल होंगे — “Viksit Bharat 2047” का लक्ष्य हासिल करें,
• और उन्होंने कहा कि अपने भीतर राम को जागाये।
• मोदी ने कहा कि अब Ayodhya — सिर्फ ऐतिहासिक/धार्मिक शहर नहीं — बल्कि “विकास का मॉडल” बनेगा। सड़क, विमान–रूट, यातायात, तीर्थ-यात्रा से जुड़े निवेश से पर्यटन, धर्मयात्रा से आय, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को बल मिल सकता है।
• मोदी की 2047 की बात — वह संकेत है कि मंदिर नहीं सिर्फ धार्मिक है, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास की एक बड़ी सोच का हिस्सा है। धर्म-आस्था, संस्कृति, और विकास को जोड़कर एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा सकता है
• उन्होंने आगाह किया कि सिर्फ वर्तमान पर ध्यान देना गलत होगा —क्यूंकि हमें आने वाली पीढ़ियों को देखते हुए निर्णय लेने चाहिए; क्योंकि “यह देश हमारी आने से पहले भी था, और हमारे जाने के बाद भी रहेगा।

25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण (flag-hoisting) के दौरान, मोदी ने कहा कि “पूरी दुनिया आज राम-मय है इस तरह से, मंदिर और उसकी महत्ता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किए जाने वाले आस्था-संकेत के रूप में देखी जाए, इस भाव को उन्होंने जताया। मोदी के बयान में स्पष्ट रूप से “राम मंदिर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल घोषित किया गया है| Ram Mandir + Ayodhya को सिर्फ एक स्थानीय/राष्ट्रीय मंदिर नहीं, बल्कि वैश्विक-सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन केंद्र / अंतरराष्ट्रीय तीर्थ-स्थल के रूप में तैयार किया जाए।इससे यह उम्मीद है कि Ram Mandir और Ayodhya अब धार्मिक पर्यटन + अंतरराष्ट्रीय यात्रियों (भारत और विदेश दोनों) के लिए आकर्षक स्थान बन जाएगा।

निष्कर्ष

Ram Mandir और Ayodhya अब धार्मिक पर्यटन + अंतरराष्ट्रीय यात्रियों (भारत और विदेश दोनों) के लिए आकर्षक स्थान बन जाएगा। अंतरराष्ट्रीय तीर्थ-स्थल के रूप में तैयार किया जाए | आज अयोध्या में धर्मध्वज आरोहणन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्किऐतिहासिक, सामाजिक औरसांस्कृतिक पुनरुत्था का प्रतीक है। इस झंडे को मंदिर के शिखर पर फहराया जाना, मंदिर की संरचनात्मक पूर्णता और मंदिर को एक सार्वजनिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सक्रिय गंतव्य के रूप में स्थापित करता है। यह झंडा उन आदर्शों का जीता-जागता प्रतीक बनेगा जो रामराज्य, सहिष्णुता, भक्ति और धार्मिक गौरव के अनुरूप हैं। साथ ही, यह समारोह भविष्य में अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय तीर्थस्थल, पर्यटन स्थल और हिन्दू संस्कृति का एक प्रकाशस्तंभ बनाने में मदद कर सकता है। धार्मिक दृष्टि से, यह झंडा “सनातन धर्म की आवाज़” है — एक आवाज़ जो अतीत से आती है, वर्तमान में गूंजती है, और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी। राम मंदिर पर ध्वजारोहण भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण, ऐतिहासिक पूर्णता, राष्ट्रीय एकता और भविष्य के वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है। राम केवल धार्मिक नहीं, बल्कि न्याय, मर्यादा, सत्य और आदर्श शासन (Ram Rajya) का प्रतीक हैं। ध्वज इन मूल्यों के साथ देश को जोड़ते हुए राष्ट्रीय एकता, सामूहिक भाव और सामाजिक सामंजस्य का संदेश देता है।Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan 2025- 500 साल बाद राम मंदिर में लहराएगा धर्म ध्वज 

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